पतंजलि कोरोनिल किट के फायदे – patanjali coronil kit ke fayde in hindi

पतंजलि कोरोनिल किट पतंजलि आयुर्वेद संस्थान के द्वारा बनाई गई एक सुविख्यात आयुर्वेदिक औषधि है। इसका उपयोग मुख्यतः शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में किया जाता है। यह औषधि एक अनुसंधान के बाद बनाई गई है एवं इसमें आयुर्वेद की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध जड़ी बूटियों का प्रयोग किया गया है। पतंजलि कोरोनिल किट के फायदे इम्युनिटी तो बढ़ाते ही हैं साथ ही श्वसन तंत्र की समस्याओं, बुखार, तनाव आदि में भी काफी फायदेमंद है।

दिव्य पतंजलि कोरोनिल किट में कौन-कौन सी औषधियाँ है ?

दिव्य पतंजलि कोरोनिल किट में तीन तरह की दवाएं होती है-

कोरोनिल टेबलेट

श्वासारी टेबलेट

अणु तैल

कोरोनिल टेबलेट

कोरोनिल टेबलेट के निम्न घटक है-

तुलसी- तुलसी का प्रयोग सदियों से स्वास्थ्य रक्षा के लिए किया जाता रहा है। आयुर्वेद के अनुसार प्रतिदिन तुलसी का सेवन करने से व्यक्ति कई तरह की बीमारियों से बचा रह सकता है। तुलसी में हानिकारक रोगाणुओं को नष्ट करने की क्षमता है। यह बुखार, सर्दी -जुखाम, खाँसी आदि रोगों को दूर करती और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाती है। तुलसी कोरोनिल टेबलेट का एक मुख्य घटक है।

गिलोय- गिलोय को आयुर्वेद में रसायन माना गया है, यह आयुर्वेदिक औषधि रसायन चूर्ण का भी एक प्रमुख घटक है। यह इम्युनिटी को बढ़ाने वाली है और बुखार, उल्टी, सूखी खांसी, बवासीर, पीलिया, कैंसर, मूत्र रोग आदि में लाभकारी है। यह पाचन शक्ति के लिए भी लाभकारी है और भूख बढाती है। गिलोय वात, कफ, पित्त को समुचित करने वाली जड़ी-बूटी है। इसमें पाए जाने वाले तत्त्व रोगाणुओं को नष्ट करने में सक्षम है।

अश्वगंधा- अश्वगंधा में पाए जाने वाले तत्त्व रोगाणुओं को नष्ट करने में सहायक है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते और शरीर को नया बल प्रदान करते हैं। यह शरीर की कोशिकाओं की रक्षा करता है और कोशिकाओं का स्वास्थ्य बनाये रखता है।

श्वासारी टेबलेट

श्वासारी टेबलेट के प्रयोग से श्वसन तंत्र से सम्बन्धित समस्याएं दूर होती है और फेफड़ों को बल मिलता है। श्वासारि टैबलेट के घटक द्रव्य है- मुलेठी, काकड़ासिंगी, रुदन्ति, सौंठ, मरीच, छोटी पीपल, लवंग, दालचीनी, अकरकरा, अभ्रक भस्म, मुक्ता शुक्ति भस्म, गोदन्ती भस्म, कपर्दक भस्म, प्रवाल पिष्टी, स्फटिक भस्म, टंकण भस्म।

अणु तैल

अणु तैल जड़ी-बूटियों से बना हुआ आयुर्वेदिक तैल है जिसका प्रयोग नस्य के लिए किया जाता है। नस्य यानि नाक में तैल की कुछ बूंदें डालना। अणु तैल के प्रयोग से श्वसन तंत्र और मष्तिष्क रोगों में विशेष लाभ होता है। अणु तैल के घटक द्रव्य है- सफ़ेद चन्दन, अगर, तेजपात, दारू हल्दी, मुलैठी, बला, पुण्डरीका, छोटी इलायची, वायविडंग, बेल, कमल, नेत्रबाला, खस, केवटीमोथा, दालचीनी, नागरमोथा, अनंतमूल, सालपर्णी, जीवन्ति, प्रसनिपर्णी, देवदारु, शतावर, रेणुका, छोटी कटेरी, सुरभि, कमलकेसर, अजा-दुग्ध,और तिल तैल।

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पतंजलि कोरोनिल किट के फायदे एवं उपयोग-

पतंजलि कोरोनिल किट की औषधियों के मुख्यतः निम्न फायदे एवं उपयोग है-

रोगप्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाने में पतंजलि कोरोनिल किट के फायदे-

कोरोनिल किट की औषधियाँ प्राकृतिक रूप से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाती है। अच्छी इम्युनिटी के लिए स्वस्थ दिनचर्या और पौष्टिक संतुलित भोजन के साथ इन औषधियों का समय-समय पर किया गया उचित सेवन बहुत लाभकारी रहता है। ये जहाँ विभिन्न हानिकारक रोगाणुओं से होने वाले रोगों से बचाव में लाभकारी है और वहीँ यदि किसी तरह का कोई संक्रमण हो भी जाता है तो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को शक्तिशाली बनाकर शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहायक है।

श्वसन तंत्र के रोगों में लाभकारी

श्वसन तंत्र के विकारों को दूर करने में कोरोनिल किट की दवाएँ काफी लाभकारी है। यह श्वसन तंत्र की कार्यप्रणाली को सुचारु करती है और विकारों को दूर करती है।

रोगाणुओं को नष्ट करने में सहायक

पतंजलि कोरोनिल किट की तुलसी, गिलोय जैसी जड़ी बूटियाँ हानिकारक रोगाणुओं को नष्ट करती है और उन्हें बढ़ने से रोकती है।

बुखार कम करने में सहायक

यह शरीर में रोगाणुओं के संक्रमण का स्तर कम करके बुखार को कम कर जल्दी स्वस्थ करने में सहायक है।

सर्दी-जुखाम आदि दूर करने में पतंजलि कोरोनिल किट के फायदे-

यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाकर सर्दी-जुखाम, खाँसी आदि रोगों से बचाव करती और इनके उपचार में लाभदायक है।

फेंफड़ो में जमा कफ निकालने में सहायक

कोरोनिल किट की औषधियाँ फेफड़ों में जमा कफ को बाहर निकालती है। यह फेफड़ों की कार्यप्रणाली को सुचारु करती है।

पथ्य-अपथ्य-

आयुर्वेदिक औषधियों को अधिक प्रभावशाली बनाने हेतु योग्य पथ्य का सेवन करना और अपथ्य का ध्यान रखना या परहेज रखना आवश्यक है।

शरीर की शक्ति अनुसार योग-प्राणायाम, भ्रमण और हल्का व्यायाम करें। शुद्ध, सात्विक, पौष्टिक और सुपाच्य भोजन का सेवन करें। तनाव से बचें और तले हुए, ठन्डे, ज्यादा तीखे, ज्यादा चिकनाई वाले, ज्यादा मीठे, माँसाहारी, भारी और प्रसंस्करित (प्रोसेस्ड) भोजन से परहेज करें। आप चाहें तो शीघ्र लाभ के लिए इन औषधियों के सेवन काल में च्यवनप्राश, एलोवेरा ज्यूस, आँवला ज्यूस का सेवन कर सकते हैं।

पतंजलि कोरोनिल सेवन विधि/लेने का तरीका एवं मात्रा-

कोरोनिल टेबलेट सामान्य स्वास्थ्य के समय रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु कुछ दिनों तक दो-दो टेबलेट सुबह शाम खाना खाने के आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से लें। रोग संक्रमण हो जाने पर उपचार में सहायता हेतु दिन में तीन बार सुबह, दोपहर और शाम को खाने के आधे घंटे बाद दो-दो टेबलेट लें।

श्वासारी टेबलेट सामान्य स्वास्थ्य के समय रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु कुछ दिनों तक दो-दो टेबलेट सुबह शाम खाना खाने के आधे घंटे पहले गुनगुने पानी से लें। रोग संक्रमण हो जाने पर उपचार में सहायता हेतु दिन में तीन बार सुबह, दोपहर और शाम को खाने के आधे घंटे पहले दो-दो टेबलेट लें।

अणु तैल रोजाना दिन में एक बार सुबह खाली पेट नाश्ते से एक घंटे पहले दोनों नाक के नथुनों में चार-चार बून्द अणु तैल डालें।

यह सभी औषधियों की मात्रा पंद्रह वर्ष से अधिकआयु वालों के लिए बताई गई है छह से चौदह साल के बच्चों के लिए इसकी आधी मात्रा का प्रयोग करें।

क्या कोरोनिल किट की औषधियों के कोई साइड इफ़ेक्ट है?

कोरोनिल किट की औषधियों के सामान्यतः किसी तरह के कोई साइड-इफ़ेक्ट नहीं है। सभी औषधियाँ निरापद जड़ी-बूटियों से बनाई गई है। फिर भी विशेष स्वास्थ्य की परिस्तिथियाँ होने पर और अधिक दिनों तक उपयोग के लिए किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेवें।

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