खदिरारिष्ट सिरप के फायदे इन हिंदी – Khadirarishta Syrup Uses & Benefits in Hindi

आयुर्वेद किसी बीमारी की जड़ या कारण पता कर उन्हें दूर करने पर बल देता है। आयुर्वेदिक दवाइयाँ सीधे बीमारी की जड़ पर प्रहार करती है और त्वचा की बहुत सी बीमारियों का कारण होता है रक्त की अशुद्धि। खदिरारिष्ट ऐसी ही एक दवा है जो रक्त को शुद्ध करती है, खदिरारिष्ट सिरप के फायदे उपयोग के कुछ ही दिनों में दिखने लग जाते हैं। यह त्वचा की बीमारियों को जड़ से दूर करने का एक प्राकृतिक उपाय है।

खदिरारिष्ट एक हर्बल आयुर्वेदिक औषधि है जिसे आसव-अरिष्ट विधि से तैयार किया जाता है। आसव-अरिष्ट में प्राकृतिक रूप से कुछ अल्कोहल होता है, जिससे ये पचने में आसान होते हैं और शीघ्र प्रभावी होते हैं। यह रक्त को शुद्ध करने में, त्वचा रोगों को दूर करने में और आंतो को सबल बनाने में बहुत उपयोगी है।

यह तीन तरह से काम करता है, पहला ये आंतों को मजबूत बनाता है, दूसरा रक्त को शुद्ध करता है और तीसरा सीधा त्वचा रोगों पर असर करता है।

खदिरारिष्ट सिरप टॉक्सिन्स या शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को पाचन क्रिया या आँतों के माध्यम से बाहर निकाल देता है। साथ ही यह आंतों को ताकतवर बनाकर विषैले एवं दूषित पदार्थों के उत्पादन को भी रोकता है, जिससे खून में और अशुद्धि या विषैले पदार्थों का जाना रुक जाता है। परिणामस्वरूप रक्त शुद्ध होता है जिससे रक्त की अशुद्धि या दोष से संबंधित बीमारियाँ जैसे त्वचा रोग आदि मिट जाते हैं। इसी तरह ये खून को भी साफ करता है और त्वचा की कोशिकाओं को शुद्ध पोषण प्राप्त करने में सहायता करता है।

खदिरारिष्ट के मुख्य गुण-

रक्त शुद्ध करने वाला- यह खून को साफ़ करता है।

त्वचा रोगों को दूर करने वाला- यह विभिन्न प्रकार के त्वचा रोगों को दूर करने में सहायक है। इसके सेवन से त्वचा रोग जड़ से दूर होते हैं।   

आम पाचक (आंतों से आम नामक दोष को दूर करने वाला)- पेट में आम नामक दोष का बढ़ जाना कई प्रकार के रोगों का कारण हो सकता है। खदिरारिष्ट आम दोष को दूर करता है।  

एलर्जी दूर करने वाला- यह शरीर की आंतरिक शक्ति बढाकर प्राकृतिक रूप से एलर्जी को दूर करने में सहायक है।  

सूजन दूर करने वाला- इसमें शरीर के किसी भी अंग की सूजन को दूर करने के गुण हैं।  

अशुद्धियाँ और विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर करने वाला- यह शरीर में जमा हुए विषैले और हानिकारक पदार्थों को मल मूत्रादि के द्वारा शरीर से बाहर निकालने में सहायक है। शारीरिक शुद्धि या डेटोक्सिफिकेशन होने पर रक्त विकार, त्वचा विकार, पाचन विकार आदि रोग प्राकृतिक रूप से ठीक होने लगते हैं और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

एंटी ऑक्सीडेंट- यह एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से युक्त है।

पाचन शक्ति वर्धक (आंतों के लिए बलवर्धक)- यह आँतों को शक्तिशाली बना कर पाचन शक्ति को बढ़ाता है।

यकृत (लीवर)  के लिए बलकारी और यकृत विकार दूर करने वाला- खदिरारिष्ट लिवर से विषाक्त पदार्थों को हटाता है और शक्तिशाली बनाता है। पीलिया आदि यकृत विकारों को दूर करने में सहायक है।

हानिकारक जीवाणुओं की वृद्धि रोकने वाला- यह हानिकारक जीवाणुओं की वृद्धि को रोक के त्वचा विकारों जैसे फोड़े-फुंसी, मुहांसों आदि को ठीक करता है।

खदिरारिष्ट के फायदे इन हिंदी – Khadirarishta Syrup Uses and Benefits in Hindi

खदिरारिष्ट के घटक

खदिरारिष्ट सिरप के निम्न घटक है-

खदिर-

खदिर का प्रयोग आयुर्वेद में खासतौर पर त्वचा रोगों के लिए किया जाता है। यह शीतवीर्य, रस में तिक्त एवं कषाय और विपाक में कटु होती है। यह कफ एवं पित्त का शमन करने वाली है। आयुर्वेद में इसे कुष्ठघन यानि कुष्ठ रोग को दूर करने वाला कहा गया है। खदिरारिष्ट में खदिर की छाल का प्रयोग किया जाता है। खदिरारिष्ट के अलावा इससे खदिरादिवटी, खदिराष्टक, खदिरादि क्वाथ आदि औषधियाँ भी बनाई जाती है। आयुर्वेद में मुख्यतः इसकी छाल और गोंद का ही औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है।   

बाबची-

बाबची को बावची, बकुची और बाकुची के नाम से भी जाना जाता है। यह सफेद दाग, खाज-खुजली, कुष्ठ आदि चर्म रोगों को दूर करने में बहुत उपयोगी है। इसके अलावा खांसी, यौन रोगों, पीलिया, बवासीर, पेट के कीड़े, दन्त रोगों आदि में  भी काफी लाभकारी है।  

देवदार-

देवदार एक पेड़ है, जो हिमालय पर बहुतायत से पाया जाता है।  जिसकी जड़, काष्ठ, छाल और फल का प्रयोग दवाओं में किया जाता है। त्वचा रोगों, नींद ना आना, सूजन, टीबी आदि रोगों में इसका प्रयोग किया जाता  है। यह लिवर को स्वस्थ करता है, खून को साफ़ करता और शरीर को डिटोक्सिफाई करता है।   

दारू हरिद्रा-

आयुर्वेद में दारुहरिद्रा का प्रयोग बहुत से रोगों में किया जाता है।  इसका प्रयोग मुख रोगों, बुखार, चर्म रोगों, डायबिटीज, नेत्र रोगों आदि में किया जाता है।

त्रिफला-

त्रिफला हरड़, बहेड़ा और आँवला का मिश्रण है, आयुर्वेद में इसे बहुत गुणकारी बताया गया है। यह चर्म रोगों में लाभकारी है और शरीर को डिटॉक्सीफाई करने वाला है।   

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धातकी फूल-

धातकी का पौधा औषधीय गुणों से समृद्ध पौधा होता है। इसमें जनवरी से अप्रैल तक फूल आते हैं। यह अतिसार, रक्त विकार, अल्सर, चर्म रोगों, पित्त रोगों, मधुमेह, ल्यूकोरिआ आदि रोगों में उपयोगी है।  

पिप्पली-

इसे पीपर या पीपल भी कहा जाता है। पिप्पली पाचन शक्ति बढ़ाने वाली, वात और कफ नाशक, रेचक और वृष्य गुणों से युक्त है। यह खांसी, उदर रोग,  श्वास रोग, कुष्ठ रोग, ज्वर, बवासीर आदि रोगों में लाभकारी है।  

कंकोल-

इसे शीतलचीनी या कबाबचीनी के नाम से भी जाना जाता है। यह एंटीसेप्टिक और एंटीइंफ्लेमेन्ट्री गुणों से युक्त होती है और बुखार, सूजन, सिरदर्द, बवासीर आदि रोगों में उपयोगी है।

लौंग-

लौंग एक मसाले के साथ ही औषधि के रूप में भी बहुत उपयोगी है। बहुत सी आयुर्वेदिक दवाओं में लौंग का प्रयोग किया जाता है। लौंग पाचन शक्ति वर्धक है। यह दांत दर्द, जोड़ों के दर्द, श्वसन तंत्र के रोगों, सिर दर्द आदि रोगों में बहुत उपयोगी है।   

नागकेसर-

आयुर्वेद में नागकेसर को बहुत उपयोगी माना गया है। यह खांसी, हिचकी, हैजा, पेट की जलन, मासिक धर्म संबंधी विकार, जुकाम, खाज-खुजली आदि रोगों में बहुत लाभकारी है।  

तेजपत्ता-

तेजपत्ता में दर्दनाशक और एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह अपच, खांसी आदि रोगों में उपयोगी है।   

छोटी इलायची-

बेहतरीन खुशबू के साथ ही इलायची बहुत से बेहतरीन सेहतमंद गुणों से भी भरपूर है। यह रक्तचाप, उदर विकारों, यौन विकारों, एसिडिटी, शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने आदि में उपयोगी है।  

दालचीनी-

दालचीनी भी एक मसाला होने के साथ ही औषधीय गुणों से भरपूर है। यह उष्ण प्रकृति का होता है तथा पाचन विकारों, सर्दी जुकाम आदि में उपयोगी है।

शहद एवं मिश्री-

शहद में सर्दी जुकाम, खांसी, त्वचा रोगों को दूर करने के गुण है साथ ही अन्य औषधियों को अधिक प्रभावी भी बनाता है। यह एक बहुत अच्छा अनुपान (औषधियों के साथ लिया जाने वाला) है।  

खदिरारिष्ट किन-किन रोगों में उपयोगी है-

यह निम्न रोगों में बहुत उपयोगी है-

स्किन या त्वचा एलर्जी

सभी तरह के त्वचा रोग (एग्जिमा, पिम्पल्स, खुजली, सोरायसिस आदि)

आंतों के कीड़े

कुष्ठ रोग

पित्ती

लिवर की बीमारियाँ

ट्यूमर

एनीमिया आदि।

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खदिरारिष्ट के क्या मुख्य फायदे है- Khadirarishta syrup main benefits in hindi

khadirarisht for eczemaखदिरारिष्ट फॉर एक्जिमा-

आयुर्वेदिक औषधि खदिरारिष्ट एक्जिमा को दूर करने में बहुत उपयोगी है, इसके लिए पूरा फायदा मिलने तक इसका नियमित 20 एम एल की मात्रा में सुबह शाम खाने के बाद सेवन करें। इसके अलावा सुबह खाली पेट थोड़ा नीम का रस पियें और सोने से पहले हल्दी वाला दूध पियें। हो सके तो पहले एक बार किसी अच्छे वैध के मार्गदर्शन में पंचकर्म जरूर करवा लें।

मुहांसों को ठीक करने में

खदिरारिष्ट मुहांसों (पिम्पल्स) को ठीक करने में बहुत उपयोगी है। यह रक्त को शुद्ध करता है और हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है। कुछ दिन तक इसका नियमित सेवन मुहाँसों को दूर करने में लाभकारी है।

खाज-खुजली की समस्या दूर करने में

खदिरारिष्ट के कुछ दिनों के सेवन से खाज खुजली जैसी समस्याओं से छुटकारा  मिलता है।

रक्त शोधक के रूप में और त्वचा रोग दूर करने के लिए

खदिरारिष्ट उत्तम रक्तशोधक है, रक्त के शुद्ध होने से कई विकार जो कि रक्त के अशुद्ध होने से उत्पन्न होते है वे दूर हो जाते हैं। इससे त्वचा विकार दूर होते हैं , साथ ही रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है।

खदिरारिष्ट की मात्रा और कैसे लें (सेवन विधि)-

इसे 12 से 24 एम एल की मात्रा में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर दिन में दो बार भोजन के बाद लिया जाता है।

खदिरारिष्ट का कोई नुकसान या साइड इफेक्ट-

सामान्यतः खदिरारिष्ट का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है परन्तु इसकी अधिक मात्रा नहीं लेनी चाहिए। अधिक मात्रा से पेट में जलन जैसी महसूस हो सकती है। साथ ही गर्भावस्था में, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों को इसका सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए।

खदिरारिष्ट सिरप प्राइस- Khadirarishta syrup price

बैधनाथ खदिरारिष्ट (अमेजन पर प्राइस जानने के लिए यहाँ क्लिक करें)–  450  एम एल – 147  रूपये

डाबर खदिरारिष्ट (अमेजन पर प्राइस जानने के लिए यहाँ क्लिक करें)– 450 एम एल – 180  रूपये

केरला आयुर्वेदा खदिरारिष्टम (अमेजन पर प्राइस जानने के लिए यहाँ क्लिक करें)– 435 एम एल – 135 रूपये ।

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