रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय – इम्युनिटी बढ़ाने के घरेलु उपाय – Immunity kaise badhaye

अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता आपके शरीर का कई बीमारियों से बचाव करती है। हम सभी जानते हैं कि बहुत से लोग अक्सर सर्दी या फ्लू का सामना करते हैं, जबकि बहुत से लोगों को बहुत कम ही सर्दी या फ्लू होता है। इसका कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता ही है।। रोग प्रतिरोधक शक्ति हमें सर्दी-जुकाम, फ्लू आदि कई बीमारियों से बचाती है। अच्छी बात यह है कि आप कुछ सरल उपायों के साथ रोग प्रतिरोधक शक्ति में सुधार कर सकते हैं। इस लेख में, आप अपनी प्रतिरक्षा शक्ति में सुधार के बारे में उपयोगी जड़ी-बूटियाँ और उपायों के बारे में जानेंगे ।

अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता आपके अच्छे स्वास्थ्य पर निर्भर करती है यानि अगर आपका समग्र स्वास्थ्य अच्छा है तो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता या इम्युनिटी भी सर्वोत्तम अवस्था में होगी।अच्छे स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक दैनिक दिनचर्या का पालन करें। यहाँ उन उपायों को बताया गया है जो आपकी प्रतिरक्षा शक्ति को स्वाभाविक रूप से बढ़ाने में बहुत सहायक हैं। इसलिए ये कदम आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने के लिए और अच्छे स्वास्थ्य में मदद करते हैं।

यह भी पढ़ें: उत्तम स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक दिनचर्या 

.रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्युनिटी पावर) बढ़ाने के प्राकृतिक आयुर्वेदिक उपाय- Immunity badhane ke gharelu ayurvedic upay

भोजन की गुणवत्ता और पोषण की मात्रा –

एक पोषण युक्त संतुलित आहार सबसे महत्वपूर्ण चीज है जो एक अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक है। शाकाहारी आहार हमेशा एक अच्छा विकल्प है। हमेशा भोजन समय पर लें। आपका कितना ही व्यस्त जीवन हो, प्रतिरक्षा शक्ति हासिल करने के लिए अपने नाश्ते को ठीक से समय पर लें। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि अपनी पाचन शक्ति को मजबूत बनाए रखें। क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार, मजबूत पाचन शक्ति आपको कई बीमारियों से बचा सकती है। इसलिए भारी भोजन और तली हुई चीजें लेने से बचें। ऐसा भोजन लें जो आसानी से पचने वाला हो।

अच्छी रोगप्रतिरोधक क्षमता के लिए अदरक, लहसुन, शहद, भारतीय मसाले, हरी चाय, ताजे फल और सब्जियां, दही, छाछ, बादाम, पालक और हल्दी को अपने आहार में शामिल करें। समय पर पौष्टिक और संतुलित भोजन का सेवन करें।

विटामिन- सी (VITAMIN-C) और ताजे फल-सब्जियां –

विटामिन-सी से भरपूर भोजन जैसे कि आंवला, खट्टे फल (नींबू, संतरा, आदि) और टमाटर खाएं। क्योंकि विटामिन- C एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है और ठंड और फ्लू को रोकने में मदद करता है।

 विटामिन सी के सप्लीमेंट के बजाय भोजन से ही पर्याप्त विटामिन-सी प्राप्त करने की कोशिश करें। याद रखें कि सिर्फ इस विटामिन को लेना पर्याप्त नहीं है। यह आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले आहार का एक हिस्सा है इसलिए पर्याप्त मात्रा में ताजे मौसमी फल-सब्जियों का नियमित सेवन करें ताकि शरीर के लिए आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स की पूर्ति हो सके।

शारीरिक रूप से (PHYSICALLY) सक्रिय रहें –

शारीरिक सक्रियता आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अच्छी है। यह स्वाभाविक रूप से प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में मददगार है। अपनी प्रतिरक्षा को सक्रिय और मजबूत रखने के लिए हर दिन कुछ शारीरिक व्यायाम करें।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए योग करें-

इम्यूनिटी पावर को बेहतर बनाने के लिए योग बहुत मददगार है। यह तनाव के हार्मोन को कम करता है और  फेफड़ों और श्वसन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। योग आपके पूरे शरीर को लाभ देता है। योग की मुद्राएं और अभ्यास समग्र स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं।

प्राणायाम, भुजंगासन, गरुड़ासन, त्रिकोणासन,अर्ध मत्स्येन्द्रासन, उत्तानासन आदि आसन विशेष लाभकारी है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त नींद ले –

अच्छी इम्युनिटी पावर के लिए पर्याप्त आराम आवश्यक है। आपकी नींद की दिनचर्या उचित होनी चाहिए। नींद का समय उम्र, काम और कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है। अच्छी सेहत और अच्छी इम्युनिटी पॉवर बनाए रखने के लिए आमतौर पर एक युवा स्वस्थ व्यक्ति को 6 से 8 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। योगासन और प्राणायाम इम्यूनिटी बढ़ाने में विशेष उपयोगी है। इससे पाचन तंत्र, हृदय आदि अंगों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

तनाव मुक्त जीवन जीने की कोशिश करें-

आजकल हमारा जीवन पहले की तुलना में अधिक व्यस्त और तनावपूर्ण हो गया है। लेकिन यह आपके स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा प्रणाली  के लिए अच्छा नहीं है। चीजों को मैनेज करें, मेडिटेशन करें, योग करें, अच्छा संगीत सुनें, और स्वस्थ मनोरंजन को थोड़ा समय दें । ऐसी दिनचर्या बनाएं जो रोजमर्रा के तनाव को प्रबंधित करने में सहायक हों।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रकृति के साथ कुछ समय बिताएं –

प्राकृतिक मनोरम स्थानों में कुछ समय बिताने की कोशिश करें। क्योंकि प्रकृति के साथ समय बिताना आपको प्रतिरक्षा शक्ति के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य में सुधार का स्वास्थ्य लाभ देता है। ऐसी जगह कृत्रिम रसायनों और प्रदूषण से मुक्त होती है।

इम्युनिटी बढ़ाने वाली जड़ी बूटियां – Immunity Booster Herbs

अश्वगंधा, तुलसी, गिलोय, मुलेठी जैसी जड़ी-बूटियां प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में उपयोगी हैं। लेकिन गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिला या विशेष स्वास्थ्य वाले व्यक्ति को किसी भी जड़ी बूटी का सेवन शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य सलाह लेनी चाहिए।

तुलसी

तुलसी एक पारंपरिक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। इस जड़ी बूटी के बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ हैं। इसलिए यह भारतीय संस्कृति में हर घर के लिए एक पवित्र पौधा माना गया है। रोगप्रतिकार शक्ति में सुधार के साथ-साथ कीटाणुओं से लड़ने के लिए यह एक प्रसिद्ध जड़ी बूटी है। यह त्वचा की कई समस्याओं को भी ठीक करता है। तुलसी लेने का सबसे अच्छा तरीका कुछ अदरक, और कुछ काली मिर्च के साथ तुलसी की चाय बनाना है। इसके अलावा, आप अपनी रेगुलर चाय में भी तुलसी को मिला सकते हैं ताकि प्रतिरक्षा शक्ति में सुधार हो सके। अधिक लाभ के लिए चीनी के स्थान पर थोड़ा गुड़ मिलाएं।

गिलोय –

आयुर्वेदिक ग्रंथों में गिलोय या गुडूची के बहुत सारे लाभों का वर्णन मिलता है। यह जड़ी बूटी रोग प्रतिरोधक शक्ति में सुधार, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने, रक्त को शुद्ध करने, हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने और संक्रमण का इलाज करने में बहुत फायदेमंद है। गिलोय में शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं। यह भी माना जाता है कि गिलोय सफेद रक्त कोशिकाओं के अच्छे स्तर को बनाए रखता है और इसलिए आपके शरीर की रोंगो से रक्षा करता है। गिलोय का रस 15 से 30 मिलीलीटर सुबह-शाम खाली पेट पानी के साथ लें। आप ज्यूस के स्थान पर गिलोय की टेबलेट्स या चूर्ण भी ले सकते हैं।

अश्वगंधा –

अश्वगंधा एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है और इम्युनिटी को बूस्ट करने में मददगार है। यह तनाव और सामान्य कमजोरी को कम करने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से आपके शरीर का स्टैमिना बढ़ता है।

पोर्टलैंड के चिकित्सा शोधकर्ताओं ने पाया कि अश्वगंधा को गाय के दूध के साथ लेने से श्वेत रक्त कोशिकाएं बढ़ सकती हैं। पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने पाया कि अश्वगंधा, गिलोय और तुलसी में वायरस से लड़ने की क्षमता हैं और इसलिए शरीर को वायरस रोगों से बचाते हैं।

यह भी पढ़ें: अश्वगंधा (असगंध) के स्वास्थ्य लाभ

मुलैठी –

आयुर्वेद में मुलैठी की जड़ का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है। यह आंत संबंधी समस्याओं में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इसमें सूजन कम करने और प्रतिरक्षा-बढ़ाने वाले गुण हैं, साथ ही यह श्वसन स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा है।

लहसुन-

लहसुन में कुछ ऐसे यौगिक होते हैं जो रोग प्रतिरोधक शक्ति को बेहतर बनाने के लिए फायदेमंद होते हैं। कच्चे लहसुन की एक या दो कली पानी के साथ खाली पेट लें या आप इसे भोजन के साथ भी ले सकते हैं। पके हुए लहसुन की तुलना में कच्चा लहसुन अधिक फायदेमंद होता है। अपने लिए लहसुन की सही मात्रा का पता लगाएं जो आपके पेट को गड़बड़ ना करें, क्योंकि कुछ लोगों में यह पेट की थोड़ी गड़बड़ी का कारण हो सकता है।

इसके अलावा च्यवनप्राश का सेवन करना, हल्दी मिश्रित गुनगुना दूध लेना भी बहुत लाभकारी है।

तुलसी, दालचीनी, सोंठ, काली मिर्च, और किशमिश से बनी हर्बल चाय पियें और इसमें गुड़ मिलाएँ। इम्युनिटी पावर बढ़ाने के लिए इस चाय / काढ़े को दिन में एक या दो बार लें।

स्वस्थ वजन-

आपका वजन आपकी ऊंचाई के अनुपात में होना चाहिए। इसके अलावा, शरीर का ज्यादा वसा प्रतिशत आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के साथ-साथ प्रतिरक्षा शक्ति के लिए भी अच्छा नहीं है।

धूम्रपान नहीं करें –

धूम्रपान आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। इसलिए धूम्रपान करने वालों में अक्सर श्वसन संबंधी समस्याएं होती हैं और उनमें प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है।

अल्कोहल या नशीले पदार्थ सेवन नहीं करें-

 शराब आपके आंत के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। अत्यधिक शराब पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली, कोशिकाओं की मात्रा और कार्यक्षमता कम हो जाती है। इसलिए शराब न पिएं और न ही अन्य किसी तरह का नशीला पदार्थ लें।

व्यक्तिगत स्वच्छता-

व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना आपको हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस से बचाता है। इसलिए यह आपके स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा के लिए अच्छा है।

चिकित्सक की सलाह के बिना दवा ना लें-

बिना चिकित्सक की सलाह के दवाएं ना लें। हमेशा डॉक्टर द्वारा बताये अनुसार ही दवा का सेवन करें। दवाओं के अनुचित उपयोग से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें खराब प्रतिरक्षा शक्ति भी शामिल है।

स्वास्थ्य समस्याओं (CHRONIC CONDITIONS) का नियंत्रण-

अस्थमा, मधुमेह आदि जैसी पुरानी स्थितियां आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकती हैं। इसलिए इन्हें नियंत्रण में रखें।

Please follow and like us: