दीर्घायु होने के उपाय, लम्बा स्वस्थ जीवन कैसे प्राप्त करें- dirghayu (lambi umar) ke liye kya kare

हर कोई एक स्वस्थ दीर्घायु जीवन जीना चाहता है, पर वास्तव में  बहुत कम लोग एक लंबा स्वस्थ जीवन जीते हैं।  साठ साल की उम्र के बाद कितने लोग स्वस्थ हैं और कितने सौ साल या उससे अधिक जीते हैं? वास्तव में बहुत कम, अधिकांश लोगों को साठ की उम्र से पहले ही कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होने लग जाती हैं और बहुत कम लोग सौ साल तक जी पाते हैं और अच्छे स्वास्थ्य के साथ तो बहुत ही कम।

जबकि एक व्यक्ति स्वस्थ शरीर और दिमाग के साथ सौ साल से अधिक जीवित रह सकता है। लेकिन अच्छे स्वास्थ्य के साथ इस उम्र को कैसे प्राप्त किया जाए, यह ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं।

आयुर्वेद हमें बताता है कि हम स्वस्थ शरीर और मन के साथ सौ साल से अधिक कैसे जी सकते हैं। आयुर्वेदिक दिनचर्या, ऋतुचर्या,  पंचकर्म और जड़ी-बूटियाँ ये सभी व्यक्ति को दीर्घायु और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान कर सकते हैं। आयुर्वेद शब्द का अर्थ है ‘जीवन का विज्ञान’ यानि आयुर्वेद का सिद्धांत यह है कि दीर्घायु के साथ स्वस्थ कैसे रहें, इसका ज्ञान आयुर्वेद हमें देता है।

दीर्घायु होने  के उपाय, लम्बा स्वस्थ जीवन कैसे प्राप्त करें- dirghayu (lambi umar) ke liye kya kare

आयुर्वेद के अनुसार जीवन पर्यन्त स्वस्थ रहकर दीर्घायु होने के उपाय हैं-

एक स्वस्थ दिनचर्या  (दैनिक दिनचर्या) –

जड़ी बूटियां और उपाय-

बीमारियों से बचाव-

शराब, तंबाकू और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से बचें-

स्वस्थ भोजन, नींद और स्वस्थ नियंत्रित यौन गतिविधियाँ-

पानी, भोजन और हवा की शुद्धता और गुणवत्ता-

सकारात्मक सोच और खुशी-

तनाव प्रबंधन-

हानिकारक रसायनों और सामग्रियों के उपयोग से बचें-

उपवास और शरीर की बाहरी और भीतरी शुद्धता-

योग और व्यायाम –

अच्छा पाचन स्वास्थ्य –

प्राकृतिक वेगों को ना रोकें –

एक स्वस्थ दिनचर्या (दैनिक दिनचर्या) –

एक स्वस्थ आयुर्वेदिक दिनचर्या आपको स्वस्थ रखती और दीर्घायु बनाने में सहायक हैं। इसमें प्रतिदिन स्वास्थ्य के लिए किये जाने वाले कार्यों के बारे में बताया गया है। सूर्योदय से कम से कम 45 मिनट पहले जागना आपके  स्वास्थ्य के लिए बहुत बढ़िया है। स्वस्थ लंबे जीवन के लिए आयुर्वेदिक दिनचर्या का पालन करें।

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दीर्घायु होने के लिए जड़ी बूटियां और उपाय –

अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए मौसम के अनुसार ‘त्रिफला चूर्ण’ का नियमित उपयोग बहुत फायदेमंद है।

ज्येष्ठ-आषाढ़ (जून-जुलाई) – गुड़ के साथ त्रिफला चूर्ण लें।

श्रावण-भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) – सेंधा नमक के साथ लेना अधिक फायदेमंद है।

अश्विन-कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) – चीनी के साथ त्रिफला चूर्ण लें।

मार्गशीर्ष-पौष (दिसंबर-जनवरी) – सोंठ (सूखा अदरक पाउडर) के साथ लें।

माघ-फाल्गुन (फरवरी-मार्च) – त्रिफला को छोटी पीपल चूर्ण के साथ लें।

चैत्र-वैशाख (अप्रैल-मई) – इस मौसम में अधिक लाभ के लिए त्रिफला को शहद के साथ लें।

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शहद, गाय के दूध और घी का नियमित उपयोग दीर्घायु के लिए बहुत फायदेमंद है।

हर दिन दोपहर के भोजन के बाद छाछ लें।

नियमित रूप से आंवला और ‘छोटी हरड़े’ का उपयोग करें।

रात भर तांबे के बर्तन में पानी रखें और अगले दिन सुबह उठते ही पिएं। यह पेट की सफाई   के साथ साथ संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है।

तुलसी के पत्तों का ताजा रस शहद के साथ सुबह खाली पेट लें।

अश्वगंधा, शतावर, ब्राह्मी, मुसली, गोटू कोला जैसे आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का समय-समय पर उपयोग करें।

शहद या / और दूध के साथ ‘शुध शिलाजीत’ का नियमित उपयोग।

‘च्यवनप्राश’ या/और ‘ब्रह्मरसायन’ का नियमित उपयोग समग्र स्वास्थ्य, युवावस्था और लंबी उम्र के लिए बहुत फायदेमंद है।

रोगों से बचाव-

बीमारियां अक्सर आपको शारीरिक रूप से कमजोर बनाती हैं। एक लंबी बीमारी आपको वृद्ध दिखा सकती है और आपके जीवन काल को कम कर सकती है। साथ ही, कुछ बीमारियाँ जानलेवा होती हैं। इसलिए बीमारियों से बचाव हमेशा बेहतर होता है। आयुर्वेद हमें बताता है कि बीमारियों को कैसे रोका जा सकता है। बीमारियों से बचाव के लिए स्वस्थ आदतों और नियमों का पालन करें।

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शराब, तंबाकू और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से बचें-

यदि आप एक स्वस्थ खुशहाल जीवन जीना चाहते हैं तो शराब, किसी भी प्रकार के तम्बाकू उत्पाद, और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से बचना बेहतर है। अपने स्वास्थ्य और मानसिक शांति को बर्बाद करने का इन चीजों को कोई मौका ना दें। इसके बजाय, स्वस्थ मनोरंजन और हॉबीज के लिए कुछ समय निकालें।

स्वस्थ भोजन, नींद और यौन गतिविधियाँ-

आयुर्वेद हमें बताता है कि स्वास्थ्य की तीन नींव या स्तंभ है- भोजन, निद्रा और ब्रह्मचर्य हैं। हम में से अधिकांश दवाओं और टॉनिक पर ज्यादा ध्यान देते हैं लेकिन अक्सर इन तीन स्तंभों के बारे में भूल जाते हैं। एक पौष्टिक और संतुलित आहार और आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त नींद, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन की लंबी उम्र के लिए जरूरी है। इसके अलावा, ब्रह्मचर्य अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

आप में से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि कोई विवाहित या युवा व्यक्ति ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन कैसे कर सकता है। वैसे, आयुर्वेद सेक्स को पूरी तरह छोड़ने के बारे में नहीं बताता है और यह हर किसी के लिए संभव भी नहीं है। लेकिन यह संभव है कि व्यक्ति को अपने शरीर की शक्ति को ध्यान में रखकर यौन गतिविधियों से मन और शरीर को पर्याप्त आराम देना चाहिए यानि  यौन शक्ति को व्यर्थ में नष्ट नहीं करना चाहिए, यह भी एक प्रकार का ब्रह्मचर्य ही है। ब्रह्मचर्य जीवन की लंबी उम्र और युवावस्था के लिए जरूरी है।

दीर्घायु के लिए जल, भोजन और वायु की शुद्धता और गुणवत्ता-

हम सभी जानते हैं कि दुनिया के कुछ क्षेत्रों के लोगों में लंबी उम्र, अच्छा स्वास्थ्य और ज्यादा समय तक युवावस्था होती है। इन लोगों के लिए यह कैसे संभव हो जाता है यदि आप कुछ शोध करते हैं तो आपको पता चलेगा कि प्रमुख चीजें पानी और भोजन की शुद्धता और गुणवत्ता हैं। लेकिन दुनिया में हर किसी के पास वहां जाने का कोई विकल्प या मौका नहीं होता है। 

पर हम कम से कम हम उन संसाधनों की थोड़ी बहुत व्यवस्था तो कर ही सकते हैं जो हमें शुद्ध पानी, हवा और भोजन प्रदान कर सकते हैं। आप अपने घर में एक सुंदर बगीचा विकसित कर सकते हैं, कुछ इनडोर पौधे जो आपके घर और कार्यालय में वायु प्रदूषण को कम कर सकते हैं। जैविक फल और सब्जियां खाएं। आप इन्हें अपने किचन गार्डन में भी उगा सकते हैं। आप अपने घर में वर्षा जल संचयन कर सकते हैं। और कई और विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं यदि आप इसके बारे में  सोचते हैं तो ।

सकारात्मक सोच और जीवन की लंबी उम्र के लिए प्रसन्नता –

सकारात्मक सोच और प्रसन्नता आपको एक स्वस्थ जीवन और लंबी उम्र दे सकती है। यह सर्वविदित है कि जीवन में चाहे जो भी परिस्थितियां होती हैं यदि किसी में पर्याप्त सकारात्मक सोच है तो सब ठीक हो जाता है। खुशी एक विकल्प है और यह किसी भी निश्चित चीज पर निर्भर नहीं करती है, वास्तव में, हम इसे चुनते हैं।

ध्यान या मेडिटेशन करें, सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण वाली किताबें पढ़ें और सकारात्मक और खुश लोगों की संगति में रहें। धार्मिक विश्वास रखें, इससे आपको काफी सकारात्मक सोच मिल सकती है।

तनाव नियंत्रण –

तनाव आपको वृद्ध बना सकता है, बीमारियाँ दे सकता है और इसलिए यह आपके जीवन काल को छोटा कर सकता है। हमेशा अपने तनाव को नियंत्रित करने का प्रयास करें। आप सकारात्मक सोच और ध्यान या मेडिटेशन के साथ अपने तनाव का प्रबंधन कर सकते हैं। किसी चीज के बारे में गंभीर होना अच्छा है लेकिन बहुत गंभीर हो जाना या ज्यादा भावनात्मक होना अच्छा नहीं है। परिवार के साथ कुछ क्वालिटी टाइम बिताएं और हर दिन कुछ स्वस्थ मनोरंजन का आनंद लें। संगीत सुनें और अपनी हॉबीज को कुछ समय दें।

हानिकारक रसायन और सामग्री के उपयोग से बचें-

हानिकारक रसायनों और सामग्रियों के उपयोग से बचें। ये अक्सर प्रोसेस्ड फूड और पैक्ड फूड में पाए जाते हैं। प्लास्टिक में संग्रहीत खाद्य पदार्थों के उपयोग से बचें। ये सभी आपके जीवन काल को कम कर सकते हैं और आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं हैं।

उपवास और विषैले तत्वों को शरीर से बाहर निकालना (detoxification)-

सप्ताह में एक बार या पंद्रह दिन में एक बार का उपवास आपके शरीर को डिटॉक्स कर सकता है और आपके पूरे शरीर की प्रणाली को फिर से जीवंत कर सकता है। इसलिए यह अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु बनाए रखने में मददगार है। उपवास के दिनों में, पर्याप्त पानी पिएं और किसी भी प्रकार के तनाव और किसी भी कठिन शारीरिक गतिविधि से बचें। चाहें तो आप दिन में एक बार कुछ मौसमी ताजे फल ले सकते हैं।  पंचकर्म (डिटॉक्सिफिकेशन की पांच आयुर्वेदिक गतिविधियाँ) आपके पूरे शरीर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए बहुत अच्छा  हैं। आप अपने शरीर को पूरी तरह से डिटॉक्सिफाई करने के लिए साल में एक बार किसी भी आयुर्वेदिक पंचकर्म विशेषज्ञ से पंचकर्म करवा सकते हैं।

दीर्घायु के लिए योग और शारीरिक व्यायाम –

योग और व्यायाम आपको स्वस्थ और युवा बना सकते हैं और इसलिए दीर्घायु होने के लिए अच्छे है। इसके अलावा, योग में आपके शरीर के अंगों को फिर से जीवंत करने और आपके जीवन काल को बढ़ाने की शक्ति है। यदि आप एक स्वस्थ जीवन चाहते हैं तो दैनिक योग और ध्यान का अभ्यास आपकी दिनचर्या में होना चाहिए। दौड़ना और कैलिसथेनिक्स (Calisthenics) व्यायाम आपके दिल के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे हैं। इसके अलावा, दिन भर में पर्याप्त शारीरिक गतिविधि होनी चाहिए, एक ही जगह ज्यादा देर बैठे रहना अच्छा नहीं है।

शोध बताते हैं कि तेज चलने वाले लंबे समय तक जीवित रहते हैं। प्रति दिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलना आपके जीवन काल में कुछ वर्ष जोड़ सकता है। सुबह जल्दी टहलने जाएं और विशेष रूप से प्राणायाम के साथ कुछ सांस के व्यायाम करें। और एक बात, किसी भी प्रकार का शारीरिक व्यायाम अपने शरीर की ताकत के अनुसार करें, क्योंकि हर चीज की अधिकता बुरी होती है।

जीवन की लंबी उम्र के लिए अच्छा पाचन स्वास्थ्य बनाए रखें-

कुछ भी ऐसा खाने से बचें जो आपके पाचन तंत्र को कमजोर करता हो जैसे बहुत अधिक खाना, भारी भोजन, फास्ट फूड, देर रात का खाना और बिना भूख के खाना। अपनी भूख से थोड़ा कम भोजन करना बेहतर है। एक अच्छा पाचन तंत्र आपके शरीर को पोषण की पर्याप्त आपूर्ति दे सकता है, यहां तक कि आपके बुढ़ापे के दिनों में भी, और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल सकता है। यह अच्छे स्वास्थ्य और युवावस्था की निशानी है। दीर्घायु प्राप्त करने के लिए अपने पाचन स्वास्थ्य को हमेशा अच्छा रखें।

दीर्घायु होना है तो प्राकृतिक वेगों का दमन नहीं करें-

आयुर्वेद का वर्णन है कि आए हुए प्राकृतिक वेगों को दबाने से कई बीमारियां होती हैं और आपके जीवन काल में कमी आती है। ये वेग  हैं, पेशाब, मल, डकार, हिचकी, छींकना, खाँसी, उल्टी, अपान वायु , जम्हाई, आँसू, हँसी, भूख, प्यास, नींद, तेज साँस (शारीरिक क्रिया से), और आया हुआ वीर्य-स्खलन। इन वेगों को दबाया नहीं जाना चाहिए।

तो एक स्वस्थ लंबे जीवन काल के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इन बातों का पालन करने का प्रयास करें, और स्वास्थ्य और प्रसन्नता से भरपूर दीर्घायु प्राप्त करें ।

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