ब्राह्मी के फायदे इन हिंदी – ब्राह्मी का उपयोग – Brahmi ke Fayde in Hindi – Brahmi ka Upyog

ब्राह्मी एक बहुत ही उपयोगी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी, औषधि है। यह सामान्यतः सम्पूर्ण भारतवर्ष में पाई जाती है। ज्यादातर लोग ब्राह्मी को स्मरण शक्ति या दिमागी ताकत बढ़ाने वाली जड़ी-बूटी के रूप में जानते है पर इसके अलावा भी स्वास्थ्य के लिए ब्राह्मी के कई फायदे हैं। इसमें ग्लाइकोसाइड, एस्कोर्बिक एसिड, ब्राह्मिक एसिड आदि तत्व पाए जाते हैं।

प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों चरक संहिता, सुश्रुत सहिंता आदि में ब्राह्मी के फायदों का वर्णन मिलता है। ब्राह्मी से बहुत सी आयुर्वेदिक औषधियां बनायीं जाती है। यह तंत्रिका तंत्र को शक्ति देती, स्मरण शक्ति बढाती और तनाव दूर करती है। इस तरह यह विद्यार्थियों और दिमागी मेहनत करने वाले व्यक्तियों के लिए विशेष लाभकारी है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट के गुण भी हैं। ब्राह्मी नम स्थानों पर पाई जाती है और इसकी तासीर ठंडी होती है।

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Table of Contents:-

ब्राह्मी की पहचान कैसे करें / ब्राह्मी क्या है?– Brahmi ki pahchan in hindi

ब्राह्मी एक जड़ी बूटी का पौधा है जिसकी मुख्यतः पत्तियां और तना औषधीय उपयोग में लिए जाते हैं। ये पौधा पानी के स्थानों जैसे नदी या तालाब के किनारे पाया जाता है। यह पौधा गीली नम जगह पर फैलता है और इसकी शाखाएं काफी नरम होती हैं और इसके फूल नीले रंग के होते हैं । यह पौधा सामान्यतः पुरे भारत के नम स्थानों पर प्राकृतिक रूप से पाया जाता है और इसकी खेती भी की जाती है। इसकी पत्तियों का स्वाद थोड़ा फीका सा होता है। सामान्यतः दवाइयों में इसकी पत्तियों का प्रयोग किया जाता है।

ब्राह्मी के फायदे इन हिंदी - ब्राह्मी का उपयोग - Brahmi ke Fayde in Hindi – Brahmi ka Upyog

ब्राह्मी से उपचार / इलाज – Brahmi se upchar/ilaj in hindi

निम्न रोगों के उपचार या इलाज ब्राह्मी में बहुत उपयोगी है।

स्मरणशक्ति या याददाश्त की कमी

अधिक तनाव

डिमेंशिया

अल्जाइमर

सूजन और दर्द

ब्रोंकाइटिस

रक्त का असाधारण जमाव

साइनस

कफ और बलगम

मिर्गी

मधुमेह

कब्ज

खांसी

बुखार

रक्तचाप

दांत का दर्द

ब्राह्मी जड़ी बूटी के फायदे व उपयोग / ब्राह्मी से होने वाले लाभ – brahmi jadi buti ke fayde, upyog / brahmi se hone vale labh/ brahmi benefits in hindi

ब्राह्मी मस्तिष्क टॉनिक के रूप में – Brahmi as a brain tonic in hindi

एक उत्तम मस्तिष्क टॉनिक के रूप में ब्राह्मी प्रसिद्ध है, इससे ब्राह्मी घृत आदि मस्तिष्क की शक्ति बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ बनाई जाती है। दिमागी ताकत बढ़ाने के लिए थोड़ी सी ब्राह्मी रात में भिगो दें और सुबह इसे थोडे से भीगे बादाम और काली मिर्च के साथ सिलबट्टे पर पीस कर मिश्री मिले हुए दूध के साथ सेवन करें। 

ब्राह्मी स्मरण शक्ति बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा/जड़ी बूटी – Brahmi memory power booster ayurvedic medicine/herb in hindi

स्मरण शक्ति बढ़ाने, दिमागी ताकत बढ़ाने और एकाग्रता बढ़ाने में ब्राह्मी का सेवन काफी सहायक है। विभिन्न शोधों से यह सिद्ध हो चुका है। यह वृद्ध स्त्री-पुरुषों में आयु के साथ होने वाले स्मरण-शक्ति के ह्रास को भी रोकती है। दूध के साथ इसका सेवन अधिक प्रभावी है।  

एकाग्रता बढ़ाने में उपयोगी – Useful in boosting concentration power

ब्राह्मी का सेवन एकाग्रता शक्ति को बढ़ाता है। अच्छी एकाग्रता किसी भी काम को सीखने और बेहतर ढंग से करने में बहुत उपयोगी है। 

ब्राह्मी डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर में लाभकारी – Brahmi useful in dimenshia and alzheimer’s in hindi

यह तंत्रिका तंत्र में हुए विकारों से उत्पन्न हुए रोगों को दूर करने के लिए एक उत्तम आयुर्वेदिक औषधि है। ब्राह्मी अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे रोगों में बहुत लाभकारी है। यह मस्तिष्क में पाए जाने वाले विभिन्न न्यूरोट्रांसमीटर के मध्य संतुलन स्थापित करती है। मस्तिष्क के अंदर के हानिकारक तत्वों को नष्ट कर मस्तिष्क को उचित पोषण प्रदान करती है।

खांसी और बुखार से राहत देने में ब्राह्मी घरेलु नुस्खे के रूप में उपयोगी – Brahmi home remedy for cough and fever in hindi

खांसी और बुखार से राहत दिलाने में ब्राह्मी घरेलु नुस्खे के रूप में ली जा सकती है। इसके लिए 3 ग्राम ब्राह्मी, 3 ग्राम शंखपुष्पी, 6 ग्राम बादाम की गिरी (बादाम को भिगो कर छिलका उतार लें) और 3 ग्राम छोटी इलायची इन सभी को थोड़े पानी के साथ अच्छे से घोंट कर छान लें। इसको मिश्री में मिलाकर दिन में एक से दो बार पिलायें। इससे खांसी और बुखार में राहत मिलती है। 

मिर्गी रोग में ब्राह्मी का उपयोग –

मिर्गी रोग में ब्राह्मी बहुत फायदेमंद है। ब्राह्मी का रस या इसकी जड़ का चूर्ण दिन में तीन बार दूध के साथ सेवन करना मिर्गी में लाभकारी है। ब्राह्मी मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर्स को नियमित और संतुलित करती है और दिमाग की अंदरूनी सूजन को कम करती है। यह मिर्गी के दौरों को रोकने में मददगार है तथा अंदरूनी विकारों को दूर कर रोग निवारण में उपयोगी है।

ब्राह्मी का तनाव दूर करने में उपयोग

ब्राह्मी में पाए जाने वाले तत्त्व शरीर में हार्मोनल संतुलन करते हैं। यह तनाव के हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को नियंत्रित करती है। ब्राह्मी की दो से तीन ताज़ी पत्तियों को चबाने से तनाव के स्तर को कम करने में मदद मिलती है।

रक्तचाप में ब्राह्मी का प्रयोग

ब्राह्मी के फायदे आपके रक्तचाप को भी सामान्य बनाये रखते हैं। ब्राह्मी के पत्तों का रस एक चम्मच की मात्रा में आधे चम्मच शहद के साथ सेवन उच्च रक्तचाप को  सामान्य करने में उपयोगी है।

दांत दर्द दूर करने में ब्राह्मी के फायदे इन हिंदी

दांत दर्द से निजात पाने के लिए एक गिलास पानी में आधा चम्मच ब्राह्मी को उबाल लें और छान लें। इस पानी को थोड़ी देर मुँह में भरकर रखने के बाद कुल्ले करें। ये दाँत दर्द को दूर करने का एक बढ़िया घरेलु नुस्खा है। 

ब्राह्मी कब्ज दूर करने और खून साफ़ करने में फायदेमंद

ब्राह्मी में पाए जाने वाले तत्त्व कब्ज को दूर करने में सहायक है, साथ ही यह खून को भी साफ़ करती है।

मधुर और साफ़ आवाज के लिए ब्राह्मी के फायदे इन हिंदी  

ब्राह्मी दस ग्राम, मुनक्का दस ग्राम और पांच ग्राम शंखपुष्पी इन सभी को चार गुना पानी में मिलाकर रात भर भिगो दें। सुबह अच्छे से मसलकर अर्क निकाल लेवें और छानकर पीलें। यह नुस्खा आपकी आवाज को साफ़ और मधुर बनाने में सहायक है और साथ ही शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को भी बनाये रखता है। 

पाचन स्वास्थ्य के लिए ब्राह्मी के फायदे इन हिंदी

ब्राह्मी में पाए जाने वाले तत्त्व पाचन स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने में सहायक है। इसके सूजन रोधी गुण अल्सर आदि पाचन तंत्र के विकारों को दूर करने में सहायक है।

सूजन दूर करने में ब्राह्मी के फायदे इन हिंदी

ब्राह्मी में शरीर की अंदरूनी और बाहरी सूजन को कम करने के गुण हैं। ब्राह्मी के पत्तों का सेवन करना और पत्तों के रस की प्रभावित हिस्से में मालिश करना सूजन में लाभकारी है। आप चाहें तो ब्राह्मी के तेल से भी मालिश कर सकते हैं। यह पीठ दर्द , सिर दर्द आदि में भी राहत पहुंचाता है। 

इम्युनिटी बढ़ाने में ब्राह्मी के फायदे इन हिंदी

ब्राह्मी का सेवन इम्युनिटी बढ़ाने में भी बहुत लाभदायक है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण और अन्य पोषक तत्त्व शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को ताकतवर बनाते हैं। 

मधुमेह में उपयोगी

ब्राह्मी ब्लड शुगर के लेवल को सामान्य बनाये रखने में काफी मददगार है। इस तरह यह मधुमेह होने से रोकने व सामान्य रक्त शर्करा का स्तर बनाये रखने में मददगार हो सकती है।

श्वसन स्वास्थ्य के लिए ब्राह्मी के फायदे इन हिंदी

ब्राह्मी की पत्तियों का सेवन कफ, बलगम, ब्रोंकाइटिस आदि श्वसन तंत्र संबंधी रोगों में लाभदायक है। यह श्वसन स्वास्थ्य को बेहतर बनाये रखने में सहायक है। 

बालों के लिए ब्राह्मी के फायदे इन हिंदी

ब्राह्मी तेल बालों की कई समस्याओं जैसे असमय सफेदी, ज्यादा बाल गिरना, रूखापन आदि में फायदेमंद है। इसका नियमित प्रयोग बालों और सिर की त्वचा को स्वस्थ बनाये रखता है। बालों की समस्या में ज्यादा फायदे के लिए ब्राह्मी तेल की मालिश के साथ ही ब्राह्मी के पंचांग का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह शाम पानी के साथ सेवन करना चाहिए। पंचांग में सम्पूर्ण पौधे के अंगों जड़, शाखाएं, पत्तियाँ, फूल और फल का चूर्ण प्रयोग किया जाता है।

ब्राह्मी के फायदे त्वचा के लिए

त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए ब्राह्मी के रस या तेल को त्वचा पर लगाया जा सकता है। यह त्वचा पर हुए निशान को कम करने में भी उपयोगी है।

ब्राह्मी की तासीर

यह शरीर को शीतलता प्रदान करती है। ब्राह्मी की तासीर ठंडी होती है । यह शरीर में बढ़ी हुयी अधिक उष्णता को दूर करने में सहायक है।

ब्राह्मी का सेवन कैसे करें / ब्राह्मी सेवन विधि  – brahmi ko kaise khaye

सामान्यतः एक बार में आधा से एक ग्राम पत्तियों का चूर्ण ले सकते हैं। ब्राह्मी का सेवन आवश्यकता के अनुसार दिन में दो से तीन बार किया जा सकता है। अपने लिए उचित खुराक जानने के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर से व्यक्तिगत परामर्श लेना चाहिए । ब्राह्मी चूर्ण को पानी, दूध, शहद, घी के साथ लिया जा सकता है। खाली पेट सेवन कर सकते हैं परन्तु यदि खाली पेट लेने से पेट गड़बड़ महसूस होता हो तो खाने के एक से दो घण्टे बाद सेवन करना चाहिए।

ब्राह्मी के नुकसान या साइड इफ़ेक्ट – brahmi ke nuksan ya side effect in hindi

सामान्यतः ब्राह्मी का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है। परन्तु किसी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या से पीड़ित व्यक्ति, पेट के रोगियों, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका सेवन डॉक्टरी सलाह से ही करना चाहिए। धीमी हृदय गति की समस्या वाले व्यक्तियों को इसके सेवन से बचना चाहिए। लम्बे समय तक उपयोग भी डॉक्टरी सलाह से ही करना चाहिए।

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