उत्तम स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद के अनुसार दिनचर्या – आयुर्वेदिक दिनचर्या- Ayurvedic Dincharya – Ayurvedic Daily Routine

आयुर्वेदिक दैनिक स्वास्थ्य दिनचर्या एक ऐसी दिनचर्या है जिसका पालन अच्छे स्वास्थ्य के लिए किया जाना चाहिए। यह दिनचर्या हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों के द्वारा बनायीं गई है जिसका पालन करके उत्तम स्वास्थ्य के साथ लम्बी आयु प्राप्त की जा सकती है।

उत्तम स्वास्थय के लिए आयुर्वेदिक दिनचर्या ayurvedic dincharya

सूर्योदय से पहले जागना-

ब्राह्मे मुहूर्त उत्तिष्ष्ठेत स्वस्थो रक्षार्थमायुषः ।।

“अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए ब्रह्ममुहूर्त में जग जाना चाहिए।”

अच्छे स्वास्थ्य के लिए आपको सूर्योदय से कम से कम 45 मिनट पहले जग जाना चाहिए, इसे ब्रह्ममुहूर्त कहा जाता है। अगर आप सुबह जल्दी उठते  हैं तो आपके पास अपनी दिनचर्या के लिए पर्याप्त समय रहता है । साथ ही इस समय हवा की गुणवत्ता बाकी दिन के समय की तुलना में काफी बेहतर रहती है। आप इस समय में अपने पूरे दिन की योजना बना सकते हैं यह आपको पूरे दिन तनावमुक्त रखेगा।

अपनी आयुर्वेदिक दिनचर्या की शुरुआत में जागने के बाद सामान्य तापमान या गुनगुना पानी पीना आपका पहला काम होना चाहिए। यह अच्छे बाउल मूवमेंट में मदद करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। अधिक लाभ के लिए तांबे के बर्तन में रात भर पानी रखें।

आप पानी पीते समय ताजे नींबू के रस की कुछ बूंदें पानी में मिला सकते हैं, यह चयापचय को बढ़ावा देने में मदद करता है, लेकिन अगर आपको एसिडिटी की समस्या है तो खाली पेट निम्बू का सेवन नहीं करें। इसके अलावा तांबे के बर्तन में नींबू का रस न रखें, पहले दूसरे गिलास में पानी डालें फिर पानी में नींबू का रस मिलाएं। तांबे के बर्तन का पानी सुबह में एक बार पीना ही काफी है, दिन भर ताम्बे के बर्तन में रखा पानी पीने की आवश्यकता नहीं है।

शौच जाना-

ठीक से पेट साफ होना अच्छे स्वास्थ्य का संकेत है, यदि आप ठीक से सोते हैं और सुबह जल्दी उठना आपकी दिनचर्या है तो स्वाभाविक रूप से आपका मल त्याग अच्छी तरह से हो जाता है।

कभी भी मल त्याग या पेशाब की इच्छा या वेग को ना रोकें, इससे पेट और गुर्दे की कई बीमारियाँ पैदा होती हैं। इसके अलावा टॉयलेट में ज्यादा समय न बिताएं। अगर आपको कब्ज है तो सोने जाने से पहले गुनगुने दूध में कुछ बूंदे बादाम के तेल की मिला के पिए।

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आयुर्वेदिक दिनचर्या में गुन्डुषाक्रिया-

मुंह में कुछ गुनगुना शुद्ध तिल या नारियल का तेल भरकर कुछ मिनटों के लिए मुँह में घुमाकर बाहर थूक दें। वॉशबेसिन में थूकें नहीं, यह आपके वॉशबेसिन के पाइप को ब्लॉक कर  देगा, इसलिए इसे किसी कागज में थूक दें और फिर इसे कूड़ेदान में फेंक दें। तेल का प्रयोग करने के बाद अपने मुँह को गुनगुने पानी से साफ़ करें। इस विधि  से दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं और दांतों की कैविटी से लड़ने में मदद मिलती है और दांतों की सड़न से सुरक्षा मिलती तथा मुँह का स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। प्रतिदिन ना कर सकें तो सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर ऐसा करें।

दांत और जीभ साफ करें-

अपने दांतों को अच्छी क़्वालिटी के ब्रश और टूथपेस्ट से साफ करें। हर्बल टूथपेस्ट का उपयोग करने की कोशिश करें। अपनी जीभ को जीभ के क्लीनर से साफ करें और अपनी उंगलियों से धीरे-धीरे अपने मसूड़ों की मालिश करें।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक दिनचर्या में अभ्यंग (तेल मालिश)-

अभ्यंगमाचरेन्नित्यं, स जराश्रमवातहा। दृष्टिप्रसादपुष्टयायुः स्वपनसुत्वक्त्वदाढ़र्यकृत।।   .

“तेल की मालिश हर दिन की जानी चाहिए क्योंकि यह वात रोगों और थकावट को दूर करती है, आंखों को स्वस्थ रखती है, शरीर को मजबूत बनाती है, दीर्घायु देती है, अच्छी नींद आने में मदद करती है, सुंदर त्वचा और मजबूत मांसपेशियां देती है।”

तेल की मालिश के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले प्राकृतिक तेल का उपयोग करें और सिर से पैर तक (पूरा शरीर) धीरे से मालिश करें। यदि आपके पास रोजाना मालिश करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है, तो सप्ताह में कम से कम एक बार अपने साप्ताहिक आयुर्वेदिक दिनचर्या में इसे शामिल करें।

ध्यान दें:

अभ्यंग सर्दी, खांसी और अपच के रोगियों के लिए अच्छा नहीं है।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक दिनचर्या में व्यायाम-

 लाघवं कर्मसामर्थ्य दीप्तोअग्निमेर्दसः क्षयः। विभक्तघनगात्रत्वं व्यायामादुपजायते।।   

“व्यायाम सहनशक्ति में सुधार करता है, पाचन शक्ति को उत्तेजित करता है, अतिरिक्त वसा को जलाता है, शरीर को सुन्दर बनाता है और मांसपेशियों को मजबूत करता है।”

आप योग, रनिंग, कैलिस्थेनिक्स, जिम वर्कआउट, एरोबिक्स, या अन्य कोई भी व्यायाम कर सकते हैं जिसे आप अपनी स्वस्थ जीवन शैली के हिस्से के रूप में पसंद करते हैं। व्यायाम हमेशा अपने शरीर की शक्ति के अनुसार ही करना चाहिए। जब आप शारीरिक व्यायाम करते समय थकने लगते हैं, तो व्यायाम समाप्त करना बुद्धिमानी है। गर्मियों में थकने से पहले ही वर्कआउट पूरा कर लें।

ध्यान दें:

अत्यधिक व्यायाम स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है और इससे कई बीमारियाँ हो सकती हैं। इसके अलावा, व्यायाम दैनिक दिनचर्या में रोजाना किया जाना चाहिए, सप्ताह में एक या दो बार आराम करना ठीक है लेकिन व्यायाम को नियमित रखें।

स्नान-

व्यायाम के बाद अगला काम स्नान है। व्यायाम और स्नान के बीच हमेशा न्यूनतम 15 मिनट का अंतर रखें, आप इस समय का उपयोग शेविंग, नाश्ते की तैयारी, या अपने दिन की योजना बनाने में कर सकते हैं।

हमेशा सामान्य तापमान के पानी से नहाना चाहिए। ज्यादा गर्म पानी सिर, बालों और आंखों के लिए अच्छा नहीं है। बहुत ठंडा या बहुत गर्म पानी का उपयोग न करें। नहाने में ज्यादा समय न लगाएं। हानिकारक कैमिकल वाले शैम्पू और साबुन से बचें, हर्बल और सौम्य शैम्पू और साबुन का उपयोग करें। भोजन के तुरंत बाद स्नान न करें, भोजन और स्नान में लगभग एक घंटे का अंतराल रखें।

आयुर्वेदिक दिनचर्या में ध्यान या मैडिटेशन-

स्नान करने के बाद आप ताजा महसूस करते हैं, इसलिए यह ध्यान लगाने (मैडिटेशन)के लिए एक अच्छा समय है। नियमित रूप से मेडिटेशन करें, यदि आपकी दिनचर्या बहुत व्यस्त है और केवल पांच मिनट का समय है तो पांच मिनट के लिए ही सही, पर ध्यान का अभ्यास अवश्य करें। समग्र स्वास्थ्य के लिए अपनी दिनचर्या में नियमित रूप से मैडिटेशन को शामिल करें।

ध्यान लगाने की सामान्य विधि यह है कि आप आलथी पालथी या  क्रॉस लेग में स्थिर और सीधे बैठें, अपनी आँखें बंद करें, भगवान से प्रार्थना करें, और एक ताल में ओम का उच्चारण करें। अपने मन को एकाग्रचित करें, गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए ओम का उच्चारण करें।

सांस को जोर से रोकने की कोशिश न करें, सब कुछ शांत और सुखद तरीके से करें । ओम् के जप की आवाज की मात्रा बहुत कम या बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए, अपने सामान्य बोलने वाले ध्वनि की मात्रा में जप करें। यदि आप पसंद करते हैं, तो आप तानपुरा ध्वनि (एक भारतीय संगीत वाद्ययंत्र) का उपयोग कर सकते हैं, आजकल तो कई तानपुरा ऐप प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं। अपने ओम् जप को तानपूरा ध्वनि के साथ मिलाने का प्रयास करें। यह आपको अधिक शांत, तनावमुक्त और आनंद से भरा महसूस कराएगा।

स्वस्थ जीवन के लिए हैल्दी नाश्ता-

नाश्ता दिन का आपका पहला भोजन है। नाश्ते के लिए सबसे अच्छी चीज कोई भी ताजा मौसमी फल है। एक बार में विभिन्न प्रकार के फल न लें, एक समय में किसी भी एक प्रकार के ताजे मौसमी फल को नाश्ते में खाना ज्यादा लाभकारी है। खाने से पहले फल को ठीक से धोएं और इसका आनंद लें। यदि आप केले या आम (पके और मीठे) लेते हैं तो दूध (ज्यादा गर्म या ठंडा नहीं) के साथ में लेना काफी पौष्टिक और शक्तिवर्धक है । पर खट्टे फलों के साथ दूध का सेवन नहीं करें।

आप फलों के साथ कुछ शहद ले सकते हैं लेकिन यदि फल खट्टा है तो शहद न लें। यदि ताजे फल उपलब्ध नहीं हैं तो आप शहद के साथ सूखे मेवे ले सकते हैं।

दोपहर का भोजन-

भोजन  के समय आपको अच्छी भूख लगी होनी चाहिए, तभी भोजन का पाचन अच्छा होगा। बिना भूख के भोजन करना आपके स्वास्थय के लिए फायदेमंद नहीं है और इससे आपको कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए इससे बचना बुद्धिमानी है। दोपहर का भोजन 11 बजे से 2 बजे के बीच में कर लेना चाहिए।

अपने लंच में संतुलित और पौष्टिक आहार लें। अगर आप मांसाहारी हैं तो आप दोपहर के भोजन में अपना मांसाहारी व्यंजन ले सकते हैं। मांसाहार और तली हुई चीजें पचने में भारी होती है, इसलिए इन्हें खाना हो तो दोपहर के भोजन में खाएं। भोजन को ठीक से चबाएं और अपने मन को भोजन पर केंद्रित करें, टीवी देखते हुए या मोबाइल चलाते हुए भोजन ना करें। भोजन लेते समय खुद को तनावमुक्त रखें।

बहुत ज्यादा न खाएं, अपने पेट में कुछ जगह खाली रखें। दोपहर के भोजन के बाद कुछ छाछ (ज्यादा ठंडी नहीं) या मट्ठे का सेवन करें, यह आपके पाचन में मदद करता है। रात के खाने के बाद या अगर आपको सर्दी, खांसी है तो छाछ ना लें। भोजन के दौरान या बीच में सामान्य तापमान का पानी थोड़ी मात्रा में पीया जा सकता है।

आयुर्वेदिक दिनचर्या के अनुसार दोपहर के भोजन के तुरंत बाद सोने से बचाना चाहिए, यह शरीर में चर्बी बढ़ाता है लेकिन यदि सोना आवश्यक हो तो भोजन और नींद के बीच न्यूनतम तीस मिनट का अंतर रखने का प्रयास करें। तेज गर्मी के दिनों में दोपहर की थोड़ी नींद अच्छी रहती है। अगर आप आजीविका के लिए कोई ऐसा काम करते हैं जिसमे रात को जागना पड़ता है तब तो दोपहर को सोना ही चाहिए पर सामान्यतः दिन के समय में बहुत अधिक नींद आपके रात के सोने के समय को बिगाड़ सकती है। भोजन के तुरंत बाद नींद, मानसिक या शारीरिक दबाव के काम, वर्क-आउट या व्यायाम , शारीरिक सम्बन्ध , स्नान, धूप सेवन , बहुत ठंडा या बहुत गर्म पेय, चाय, और कॉफी का सेवन करने से बचें।

रात का खाना-

दोपहर और रात के खाने के बीच कम से कम छह घंटे का अंतर होना चाहिए, लेकिन अगर आप इस अंतर को नहीं रख सकते हैं तो बहुत हल्का डिनर लें। अगर आपको बीच में भूख लग रही है तो आप कुछ ताजे फल ले सकते हैं।

रात के खाने और सोने के बीच कम से कम दो घंटे का अंतर बनाए रखने की कोशिश करें। डिनर में नॉन-वेज और भारी, तली-भुनी चीजों से परहेज करें, आपका डिनर हमेशा हल्का होना चाहिए। डिनर के कुछ मिनट के बाद, अपने दाँत ब्रश करें। खाने के तुरंत बाद ब्रश न करें, यह आपके दांतों के इनेमल के लिए अच्छा नहीं है।

नींद-

आयुर्वेद के अनुसार, अच्छी नींद भोजन के बाद दूसरी सबसे जरुरी चीज है। नींद की अवधि काम, उम्र और अन्य कारकों पर निर्भर करती है, लेकिन सामान्य रूप से एक स्वस्थ युवा व्यक्ति के लिए, छह से आठ घंटे की नींद पर्याप्त होती है।

एक अच्छी गुणवत्ता वाली नींद के लिए, सोने और जागने का अपना समय नियमित  करें। सोने से पहले कुछ मिनट के लिए मेडिटेशन करें। आप बिस्तर पर जाने से पहले कुछ गुनगुना दूध ले सकते हैं, लेकिन कुछ मिनट के बाद अपना मुंह साफ करना न भूलें।

अच्छे स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवन का आनंद लेने के लिए “आयुर्वेदिक दिनचर्या” का अवश्य पालन करें|

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